पत्र लेखन
२९ / १० / २०१८
पूजनीय माँ ,
नमन .
माँ ! मेरी आदर्श हो . तुम्हारी चाहत प्रेम का महासागर , गंगा की लहरों - सा अवर्णनीय है . चाहत का सच बता रही .
तुम अंधकार में प्रकाश किरन हो . ईश्वर से भी ज्यादा चाहती हूँ . तुम ईश्वर का प्रतिरूप बनकर सृष्टि का सृजन कर अपना दुग्धपान कराके पालक , पोषक बन धड़कनों की धड़कन बनी . तुम्हें अपने प्राणों से ज्यादा चाहती हूँ .
पर्वों की खुशियाँ , मानवता की गुरुवाणी , रामायण की चौपाइयाँ , दुआओं का तीर्थधाम हो .
बेटी ,
मंजु .