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Manju Gupta

Manju Gupta Matrubharti Verified

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पत्र लेखन

२९ / १० / २०१८ 

पूजनीय माँ , 

नमन .

माँ ! मेरी आदर्श हो . तुम्हारी चाहत प्रेम का महासागर , गंगा की लहरों - सा  अवर्णनीय है  . चाहत का  सच बता रही . 

तुम अंधकार में प्रकाश किरन हो . ईश्वर से  भी ज्यादा चाहती हूँ . तुम ईश्वर का प्रतिरूप बनकर सृष्टि का सृजन कर अपना दुग्धपान कराके पालक , पोषक बन  धड़कनों की धड़कन बनी .  तुम्हें अपने प्राणों से ज्यादा चाहती हूँ . 

पर्वों की खुशियाँ  , मानवता की गुरुवाणी , रामायण की चौपाइयाँ ,  दुआओं का तीर्थधाम हो . 

 बेटी , 

मंजु . 

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पत्र लेखन

२९ / १० / २०१८ 

पूजनीय माँ , 

नमन .

माँ ! मेरी आदर्श हो . तुम्हारी चाहत प्रेम का महासागर , गंगा की लहरों - सा  अवर्णनीय है  . चाहत का  सच बता रही . 

तुम अंधकार में प्रकाश किरन हो . ईश्वर से  भी ज्यादा चाहती हूँ . तुम ईश्वर का प्रतिरूप बनकर सृष्टि का सृजन कर अपना दुग्धपान कराके पालक , पोषक बन  धड़कनों की धड़कन बनी .  तुम्हें अपने प्राणों से ज्यादा चाहती हूँ . 

पर्वों की खुशियाँ  , मानवता की गुरुवाणी , रामायण की चौपाइयाँ ,  दुआओं का तीर्थधाम हो . 

 बेटी , 

मंजु . 

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प्रेम
कविता
महापुरुषों ने मानव प्रेम को
जीवन का मूल तत्व माना
दिया प्रेम जड़ - चेतन , मानव को
विश्व प्रेम सबने जाना .

खुदा के बंदे ये
खुदा इनमें रहता
करे जो प्यार इन्हें
खुदा उसे मिलता .
प्रेम कई स्वरूप का
अंत होता एक
पाओ इसके रूप को
दिल बनता नेक .

प्रीति की यही पहचान
दो रंग हो जाते एक रंग
हल्दी - चूना संग
बन जाता एक लाल रंग
पोथी हम सबने पढ़ी
पर ढाई अक्षर प्रेम का
जीवन में उतारना
होता कठिन भाव
दिल अगर इसे समझ ले
जग में फिर न हो
प्रेम अभाव
प्रेम पीड़ा हरता
कुल , जग को तार देता
अपने - पराए के भेदों से ऊपर उठ जाता .

प्रेम के गुण गाए सबने
एकरसता होती वहाँ
शबरी के झूठे बेर खाए राम ने
समरसता हुई वहाँ .
प्रेम में होती विशालता
क्षेत्र , काल , सीमा नहीं होती बाधक
अपनेपन से भर कर
आनन्द लेता साधक . .
जहाँ होता है प्रेम
वहाँ सेवा साथ रहती
जहाँ नहीं होता प्यार
वहाँ ममता दूर रहती .

हर धर्म ने इसे अवतार कहा
माना ईश का सार
सबने इसे प्रेम , इश्क ,मोहब्बत , स्नेह कहा
बसाओ इसमें संसार .
मंजु गुप्ता
वाशी

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