#LoveyouMummy
काफ़ी सोचा विचारा कि क्या लिखूँ माँ पर क्योंकि वे तो भगवान की नगरी में तब चली गयीं थी जब मैं 4 साल की थी। बस उनके सन्दर्भ में बातें ही सुनती रहती हूँ कि वे ऐसी थी, वैसी थी?..... पर मुझे कुछ भी याद नहीं उनके बारे में जिन्होंने मुझे जन्म दिया... पर कहते हैं न कि हर स्त्री में मातृत्व भाव रहता है तो मुझे हर रूप में माँ मिली है। आज मैं उस स्त्री के लिए कुछ शब्द समर्पित करना चाहती हूँ जिन्होंने न तो मुझे जन्म दिया, मेरा बैकग्राउण्ड जाने बगैर मुझे निस्वार्थ स्नेह दिया।??
आपकी भूरी आँखों में मेरे लिए सदैव वात्सल्य भाव रहते, आपके प्रेम स्नेह के सन्दर्भ में मेरा मन सदैव निःशंक रहता क्यों? क्योंकि आपके स्नेह में भक्ति है, अंतःकरण में सात्विकता है, मन में ऋजुता है, देवत्व का साक्षात्कार है, पवित्रता की अभिव्यक्ति है और मेरे लिए तो प्रत्यक्ष ईश्वर रूप है आप... ऐसे सात्विक प्रेम को भला कौन अस्वीकार करेगा।☺️ भले मैं दीदी कहकर संबोधित करती हूँ लेकिन हैं आप मेरी माँ....
टाइप करते हुए हाथ कांप रहे हैं क्योंकि जब भाव उच्च अवस्था में होते हैं तब उनको शब्दों के माध्यम से व्यक्त कर पाना संभव नहीं हो पाता.....