नैनीताल
ओ झील, मेरी ओर झांको,
मेरा प्यार तुम्हें पुकार रहा है,
तुम्हारे पास शायद समय न हो
पर मेरे पास समय ही समय है।
तुम वैसे ही छलकती हो
हवाओं को लपेटती हो,
ओ झील, मेरी ओर देखो,
मैं अतीत को दोहराने आया हूँ।
तुम जागे रहना, सोना नहीं,
क्योंकि मैं सोया नहीं हूँ अभी,
मेरे काँपते हाथ,
अभी भी दोहरा सकते हैं प्यार।
नावें जो चल रही हैं,
कोई गरीब चला रहा उन्हें,
तुम देखना आमदनी कम न हो किसी की,
क्योंकि मेरे प्यार जैसा उनका प्यार भी है मजबूत।
( फेसबुक पर" बटरोही जी" द्वारा भेजे गये तल्लीताल के चित्र को देखने पर लिखी...)
**महेश रौतेला