रिश्तें अक्सर आयने की तरह होते हैं
- खुद को साफ़ दिखातें हैं
- चाहते हुए भी कुछ छिपा नहीं सकते
- निर्मल न हो तो अच्छा नहीं लगता
- संभाल के रखना होता है
- एक बार टूटता हैं तो फिर जुड़ता नहीं
- अगर जोड़ भी दिया तो दरारों कभी मिटा नहीं सकते
- टूटता है तो चुभता हैं