जो चोट पे चोट सही है मेने उसका हिसाब बाकी है,
छुट गई है यादे तुमसे मेरी उसका हिसाब बाकी है।
तुम लाख कोशिस करलो दूर जानेकी लेकिन बस इतना,
याद रखना जो कोशिस मेने की उसका हिसाब बाकी है।
एक बार के लिए में तुमसे दूर चला भी गया तो क्या हुआ,
जो पास आके तुमने मुजे दियाहै उसका हिसाब बाकी है।
तुम तो चली गई हो बीच रास्तेमें मुजे छोड़के लेकिन ,जो,
आधा रास्ता अभी बाकी रह गया है उसका हिसाब बाकी है।
ओर जो तोड़ के आप अपने हाथोंसे चले गए होंना,वो,
सपने ओर वादे बाकी है अभी उसका हिसाब बाकी है।
कविन शाह