कितनी ही दफा देना पड़ा तुझे इम्तहान,
कभी बच्चो और कभी पति के बीच,
चुनना पड़ा किसी एक को,
कई दफा मुझे याद है,
तुम्हे रखना पड़ा अपने दिल पे पत्थर,
आखिर क्यों?
मां,तू नहीं थकती इस इम्तहानों से,
आखिर क्यों?
तू लगती है मुझे बनी किसी और ही पत्थर से,
आखिर क्यों?
तू थकती नहीं इस इम्तहानों से।
© Krishna Katyayan 2018