क्या कहे
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फुरसत के लम्हे सितारे जैसे आकाश मे
दूर से देखना पडता है इन्हे
हम जमीन पर रह कर आकाश की रोशनी
दूर से देखना पसंद करने लगे है आजकल
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- अरुण वि.देशपांडे- पुणे.
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