उदासी भरा दिन
उसमें खोज रहा हूं तुम्हें
क्षितिज के इस छोर से
उस छोर तक
तुम्हारा घर नहीं ।
ये भीनी मन्द सुगंध
अहसास कराती है
तुम यहीं कहीं हो...
पक्षियों का मधुर कलरव
तुम्हारी उपस्थिति का
अहसास कराता है;
ये मंद संगीत के स्वर
तुम्हारी अनुभूति की
गाथा कहते हैं;
पर तुम्हारा कुछ पता नहीं ।
क्या तुम्हारा अहसास
एक सुनेहरा स्वप्न है ?
कोरी कल्पना है ?
यदि नहीं
तो बताओ कि
तुम कहां हो ? कहां हो ?