तू नरम नरम है जैसे,
सुबह की ओस की बूंदे,
तेरी ख़ुशबू भी है जैसे,
मै पहचान लू आंखे मूंदे।
तेरी चाहत में मै डूबा,
शहद में मिठास है जैसे,
तू लगती है मुझे अजूबा,
संगमरमर का ताजहल है जैसे।
तेरे इश्क़ में मै खो जाऊ,
चाहे,कहने को राही हूं मै जनम से,
तेरे आंचल में मै सो जाऊ,
ठंडी छाव है ये कसम से।
© Krishna Katyayan 2018