जिंदगी के कदम- कदम पर है खड़ी रुकावटें..।
हर कोई इंसान इस धरती पर,
एक दिन जन्म लेकर आया।
जन्म लेने के बाद वक़्त गुजरता गया,
सब ने पूछा हम इधर तो आए हैं,
लेकिन ये है क्या? कोई बोला सफर है।
जो यह सफर है, तो उसका कुछ नाम तो होगा।
इस नाम के बारे में किसी ने बोला,
ये जीवन की सफर है।
या तो कुछ लोगों ने बोला,
ये तो जिंदगी की सफर है।
जीवन की सफर और जिंदगी की सफर,
दोनों सफर को सुनकर हम तो confuse हुए।
बाद में हम school गये,
वहा भाषा पढ़ने में आई।
उधर हमने सीखा की जिंदगी और जीवन,
दोनों तो एक ही झरने से, निकलने वाले समानार्थी शब्द है।
मतलब जिंदगी और जीवन,
दोनों शब्दों का मतलब तो एक ही है।
उस दिन तो जान लिया कि,
जिंदगी या जीवन एक शब्दप्रयोग है।
लेकिन हर इंसान के, जीवन का वक़्त बितता है।
उस बीतते हुए वक़्त के भीतर,
कदम -कदम पर है खड़ी रुकावटें।
वो रुकावटों को देखकर हारना,
वो जीवन की सार्थकता नहीं।
जिंदगी में आने वाली रुकावटें,
तो जिंदगी की परीक्षा है।
आज तक जिस-जिस ने,
रुकावटों का सामना किया है,
वही लोग जिंदगी को समझ पाए हैं,
और एक चीज हमेशा याद रखना,
रुकावटें हैं, तो ही जिंदगी में जान है।
क्योंकि रुकावटें आये तभी तो,
धड़कने की आवाज सुनाई देगीना।
और हम सब जानते हैं कि,
धडकनो के आवाज के बिना की,
जिंदगी को, जिंदगी ना हीं बोल सकते।
इसीलिए रुकावटों को ,
जोड़ लो जिंदगी के साथ।