अब किसी की बातों में नहीं आता
जब तक रात नहीं होती,
दीपक नहीं बनता।
नदी-नालों में जो गाद है
वैसी खाद नहीं बनता,
अब किसी की खुली याद नहीं बनता।
पहाड़ों पर जैसी हवा-पानी है
उनकी तलाश नहीं करता,
अब किसी की तलाश नहीं बनता।
सपनों को खोला नहीं करता
राहों पर मुड़ा नहीं जाता,
अब किसी की नींद उड़ाया नहीं करता।
सुबह बहुत दूर नहीं होती
देश को देखती मेरी आँखें,
आँखों में कभी रात नहीं होती।
***महेश रौतेला