#KAVYOTSAV
'अंजाना सा प्यार'
संगम में छुपी हुई
सरस्वती की तरह
प्यार भी कभी अंजाना सा,
दबा हुआ,छुपा हुआ सा
इंसान के वजूद में
पलता रहता है,
साँसों के साथ
चलता रहता है,
जिसकी खबर कभी
बड़ी देर से लगती है
कई बार अक्सर
जब बड़ी देर हो जाती है।
वो शख्स कहीं खो जाता है,
रिश्ता भी कहीं गुम हो जाता है।
प्रांंजल,
3/10/18,10.15A