इश्क़ की बाते करते करते,
लो हम कहा आ गए,
छोड़ देंगे वो धंधे सारे, कहकर हाथ छुड़ाया था,
फिर से उसी राह पर आ गए।
नफ़रत के गोबर की कलई बनाई,
प्यार की दीवार पे लेप दिया,
मन के गुब्बार को मिट्टी बनाई,
उसको भी उसपे पोत दिया।
नहीं करेंगे अब प्यार किसी से,
बोलकर,वो सारे रास्तों से मुंह मोड़ लिया,
फिर अगले मौसम में जब मिला मै किसी से,
बारिश हुई और फिर दीवार भी धो ही दिया।
©Krishna Katyayan 2018