#Kavyotsav
'भावनाएं' के अंतर्गत मेरी कविता
ज़िन्दगी-
संघषों से परिपूर्ण है,
आदर्शों से अभिभूत है,
प्रेरणाओं से वशीभूत हो ज़िन्दगी...
नफरतों से घिरी है,
आदतों में पड़ी है,
असफलता में डटी है
पर सफलता पर खड़ी हो ज़िन्दगी...
तुलना में तुली है,
तानों में तनी है,
भागों में बटी है,
भोगो से भुगी है,
पर रागों पर पली हो ज़िन्दगी...
जो कल का वजूद हो,
जो आज का गुरुर हो,
जो घृणा से दूर हो,
जो प्रेम का प्रतीक हो,
ज़िन्दगी...??