#Kavyotsav #रिश्तें
दिलों में पैदा हो रही है दीवार,
रिश्तों में पढ़ रही है दरार...
ढूंढे हर कोई एक दूसरे में कमी,
देख ये सब, आँखों में आती नमी...
क्यूँ गम के बादल है हर तरफ छाएं?
जबकी चाहे हर दिल की खुशियों की बारीश हो जाए...
हर मन चाहे आना एक दूसरे की ओर,
न जाने कहा कमजोर हो गयी है रिश्तों की डोर?
न जाने किसकी लगी है नज़र?
हर बात पर होता अगर मगर...
कौन किससे रूठ जाता है कब?
बेखबर और अनजान है इससे सब...
फिर भी दिल के कोने में है एक आस,
सब वापस आ जाएँगे पास...
ईश्वर से बस यही है मुराद,
जल्द ही आ जाए वो दिन ख़ास...