कितना वक्त गुजर गया, कितना कुछ नहीं किया मैंने सिर्फ तुम्हें ढूंढने के लिए पिछले कई सालों से कहां कहां नहीं ढूंढा कितना याद किया था मैंने उन लम्हों को जो मैंने सिर्फ तुम्हें देखते हुए गुजारें थे।
तुम शायद मुझे मिलती भी तो उस स्थिति में कि मैं तुमसे अपने मन की बात कह नहीं पाता पर आज सोचता हूं पहले ही कह दिया होता कि मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता तो बहुत अच्छा होता पर आज तुम्हें खुश देखकर ख़ुदा का शुक्रिया अदा करता हूं क्योंकि शायद तुम मेरे साथ रहती तो खुश रह पातीं या नहीं ईश्वर जाने,,पर आज मैं दुआ करता हूं कि तुम जहां भी रहो खुश रहना और अपने सपनों को साकार करना। जैसे मेरे सपने टूटे वैसे और किसी के नहीं टुटे इसीलिए मैं आज भी गुमनाम हूं।।।। दिल के तार।।