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याद है नाम तुम्हें वो गलियां, वो छत और तुम्हारे घर का वह दरवाजा जहां तुम अक्सर मुझे दिखा करती थी। मैं आज भी कई बार उन रास्तो से निकलता हूं, मगर मुझे तुम कहीं भी नजर नहीं आती। वो रास्ते तुम्हारे कदमों की आहट के बिना सूने-सूने( खामोश ) से लगते हैं। कहने को तो कुछ नहीं बदला, पर मेरी नजर से देखें कि, वहां अब पहले जैसा कुछ नहीं रहा। कहने को तो मैं आज भी वही हूं पहले जैसा, पर मुझमें अब पहले जैसा कुछ नहीं रहा। हो सके तो लौटकर वापस आ जाओ, वो रास्ते हम दोनों का आज भी इंतजार करते हैं, पर ये मुमकिन नहीं, में जानता हूं। कसम से जिंदगी खाली-खाली सी है, तुम्हारे बिना।।।।।। मन के तार।।।।।।
कितना वक्त गुजर गया, कितना कुछ नहीं किया मैंने सिर्फ तुम्हें ढूंढने के लिए पिछले कई सालों से कहां कहां नहीं ढूंढा कितना याद किया था मैंने उन लम्हों को जो मैंने सिर्फ तुम्हें देखते हुए गुजारें थे। तुम शायद मुझे मिलती भी तो उस स्थिति में कि मैं तुमसे अपने मन की बात कह नहीं पाता पर आज सोचता हूं पहले ही कह दिया होता कि मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता तो बहुत अच्छा होता पर आज तुम्हें खुश देखकर ख़ुदा का शुक्रिया अदा करता हूं क्योंकि शायद तुम मेरे साथ रहती तो खुश रह पातीं या नहीं ईश्वर जाने,,पर आज मैं दुआ करता हूं कि तुम जहां भी रहो खुश रहना और अपने सपनों को साकार करना। जैसे मेरे सपने टूटे वैसे और किसी के नहीं टुटे इसीलिए मैं आज भी गुमनाम हूं।।।। दिल के तार।।
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