#KAVYOTSAV
मेरी तलास न करना
मैं खो गया हुं|
था आईना
अब फरसी हो गया हुं|
जब मै नीकलता था घर से
बागो मे बहार आ जाती थी,
और आदर से लोग
खडे हो जाते थे;
आज ऊठ भी नही शकता
पंगु हो गया हुं|
मै चलता था
तो डोलती थी दुनिया
आज मै
ईक खबर सा हो गया हुं|
था हराभरा आशियाना
उझड-उझड सा हो गया हुं|
उसने छोडा
फिर
कर किसीने नही पकडा
मै अब बैरबिखेर हो गया हुं|
था जमाना
थी मेरी भी ईक कहानी
आज फिर कहानी बनकर रेह गया हुं|
थर्रथर्राते थे
मेरी मौंजुदगी मे
वही आज डांट रहे है|
गया वो जमाना
गई जिंदगानी भी,
गुमनाम हो गया हुं
बनकर झुठी कहानी;
अब,
न आना कब्र पर मेरी
न ही आँसुं बहाना
मिट्टी का था
अब फिर मिट्टी हो गया हुं|
-અશ્ક રેશમિયા