मेरे अंतिम समय की
अंतिम चाहत तुम्हें बता रही हूं कि‚
आज तुम हदों से ज्यादा ही याद आये हो‚
आज तुम हदों से ज्यादा ही याद आये हो‚
मन बहुत उदास है
दिल बहुत बोझिल है‚
आंखों में आँसू भरे भरे हैं
आवाज भीतर ही घुंट रही है।
आज तुम हदों से …………
आज मेरी रूह बहुत बेैचेन है‚
कहीं ज़रा सा भी चैन नहीं है‚
लगता है सॉंसे गले में ही अटक जायेंगी‚
मैरी नज़र के सामने तुम ही हो‚
मेरी डूबती उभरती आवाज़ में भी तुम ही हो‚
आज तुम हदों से …………
यह चाहतें हदों से ज्यादा है मेरी कि‚
जब मेरी रूह बहन छोड‚ रही हो‚
तब मेरा शीश तुम्हारे चरन में हो‚
तुम्हारा हाथ मेरे सर पर हो‚
मेरे होठों पे नाम तुम्हारा हो
अर्थी मेरी जहॉं से उठे‚
वह चौखट तुम्हारी हो‚ आंगँन तुम्हारा हो‚
मेरी अर्थी जहाँ से भी गुज़रे
गली तुम्हारी‚ महल्ला तुम्हारा हो।
मेरी अर्थी उठाये कंधे तुम्हारे हों‚
उसे मुखाग्नि देते हुए हाथ तुम्हारे हों‚
मेरी अस्थियाँ बहोरती उँगलीयां भी तुम्हारी हों‚
उसे गंगा में बहाने के लिये
गंगातट पर भी तुम ही हो‚
और मुझे अंतिम विदा देती हुई
नम आंखे भी तुम्हारी हों ।
आज तुम हदों से …………
#Kavyotsav