#KAVYOTSAV
#प्रेम
तुम आना फिर एक बार प्रिये...
कितना कुछ कहना था तुमसे
मन को कितना बांध रखा था
कब से इस आकुल अंतर में
प्रेम निवेदन साध रखा था
कह न सका वह इस बार प्रिये,
तुम आना फिर एक बार प्रिये...
सोंधा सा संगीत रचा था
बारिश की रिमझिम धारों से
वासंती एक लिबास बुना था
तितली के रंग उधारों से
दे न सका यह उपहार प्रिये,
तुम आना फिर एक बार प्रिये...
अबके आना तो साथ मेरे
दो पल भर एक उम्र बिताना
जब जाओ तो इतना करना
मुझको धीरज यह दे जाना
फिर आओगी इस द्वार प्रिये,
तुम आना फिर एक बार प्रिये...
तुम आना फिर एक बार प्रिये.......