#kavyotsav
टूटता रहा, बिखरता रहा, फिरभी अपने आपमें जुड़ता रहा,
दूर थी मंज़लि बहुत मगर, मेहनतो से अपनी में पहुचता रहा ।
कई आए तूफान, आंधियाभी आई जिंदगी की राहो में,
गिरता, उठता हरहालमें, अपने आप ही सम्भलता रहा ।
लोग मिले कई रास्तो पर, कुछ जानने वाले, कुछ अनजाने
किसीने दिया हाथ तो, किसीका दिल थामकर बहलता रहा ।
कभी पहोंचे गलत जगह, कभी राह सही नजर नहीं आई,
न जाने किसकी तलास में, मैं ! इतनी दूर तक भटकता रहा ।
ना साथ कोई आया है तेरे, ना साथ कोई अब जाएगा तेरे,
हर हाल में होकर खुश अबतो, गीत गमो के गुनगुनाता रहा ।
#नीरव_पटेल 'श्याम'