शीर्षक: रिश्तों के कहर
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एहसासों का लावा
दिल के ज्वालामुखी से होकर
बस फटने को है।
बचना
जल न जाना तुम।।
अश्कों का ज्वार
आँखों के समन्दर से होकर
उमड़ने को है।
देखो
बह न जाना तुम।।
भावों के अंधड़
सांसों के रास्ते निकलकर
चलने को हैं।
जमना
उड़ न जाना तुम।।
ग़मों के बादल
मन में घने भरने को हैं।
सोचो
घिर न जाना तुम।।
रिश्तों की बिसात
यहां बिखरने को है।
संभलो
बिखर न जाना तुम।।
#Kavyotsav