#kavyotsav
प्रेम
बहुत दिनों के बाद खुशी के
अश्रुविंदु छलकाएं है ,
दीप जले हैं घर आंगन में
प्रियतम मेरे आए हैं ।
एक पल रही देखती उनको
घन केशन के छाए हैं ,
नैन मिले हैं मेरे उनसे
प्रियतम मेरे आए हैं।
सूर्यकांति से शोभित कुंडल
शोभा वरनी न जाए है ,
मधुर अधर पर साज सजाए
प्रियतम मेरे आए हैं ।
ओड़ पितांबर मुरली धुन में
गीत अनोखे गाए हैं ,
प्राणों से भी प्राणप्रिय
प्रियतम मेरे आए हैं ।
प्रियतम की सुन्दर बांहों में
आनन्द नहीं समाए है ,
छोड़ जगत का सारा वैभव
प्रियतम मेरे आए हैं ।
उनके आगमन में मैंने
गीत अनेकों गाऐ हैं ,
बहुत दिनों के बाद सखी री
प्रियतम मेरे आए हैं ।
- आनन्द सहोदर
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