#Kavyotsav
रिश्ते
तितलियों के पीछे भागते भागते ,
कब बचपन हाथों से फिसल गया , पता नहीं।
जाने अंजानें संस्कारों परंपराओं ने ,
रिश्तों के पीछे भागना सिखा दिया ,
उन्हे संभालना रिश्तों के लिए सब कुछ सहना सिखा दिया ।
मुट्ठी बांध कर चलते हैं , कहीं कोई रिश्ता फिसल न जाये ।
थक कर दिल ने सोचा इन रिश्तों की छाया में थोड़ा विश्राम तो करलें ।
मुट्ठी खोली तो कुछ चिप चिपे बदबूदार निशान थे ,
रिश्ता कहीं नहीं।
मन बोला हिम्मत है तो इन निशानों को ,
दर्द की तरह पालो , या इन्हे झिटक कर सशक्त हो जाओ ,
जीवन का उद्देश्य तलाशो ।
रिश्तों को जीवन का अवरोध न बनाओ ।
कुछ ऐसे भी रिश्ते बनाओ , जो बिना किसी रिश्ते,
तुम्हारे दिल में उतर जाएँ।
-विजय लक्ष्मी
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