#Kavyotsav
तुम्हें पाने के लिए...!
याद हैं वो जुनून हमें आज भी,
तुम्हें पाने के लिए कई मन्नतें की
दुआओं में शामिल तुम्हारी आरजू की
हर मंदिर,मस्जिद एकही गुजारिश की
सुन ली उसने ऐसी गुहार लगाई,
किस्मत की लकीरें फ़ेर डाली थी सारी |
तुम्हें पाना ज़िद्द कुछ ऐसी थी हमारी,
रबने भी चुपचाप मांगे मान ली सारी |
तुम्हें क्या पता हमनें कितनी नींदे जलाई,
तुम्हें पाने के लिए ,बाबुल से ले ली बिदाई |
ख़ुश हुए थे हम दिल में बसके तुम्हारे,
नए रास्तों पर साथ चलके तुम्हारे |
कितने साल पल्लू से बांध रखी घर की चाबियाँ तुम्हारी
अब इजाजत दो तो जाये हम, जान अटकी पड़ी हैं हमारी |
पता नहीं कब थक गए हम इस सफ़र में साथ देते,
आख़िर जिन्नतों की महफ़िल बुला रही हैं मिलने |
वादा रहा अंबर से देखा करेंगे रोज तुम्हें,
आँसू ना बहाना जल्द ही मिलने आयेंगे तुम्हें |
रब से सौदा कुछ ऐसेही किया था हमने
बस्स..! तुम्हें पाने के लिए | बस्स..! तुम्हें पाने के लिए |
by Dip