#kavyotsav
घर का भेदी
घर का भेदी कह कर क्यों हो
विभीषणजी की निन्दा ?
सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त
समझे सीता की व्यथा ।
दुष्टा बहना ने बहकाया,
कामी रावण को उकसाया,
छल-बल से पापी असुर
सती सीता को हर लाया ।
भाई की दुर्मति से त्रस्त
रोए विभीषण की सज्जनता,
सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त
समझे सीता की व्यथा ।
राममयी सीया धर्ममयी
दृढ़ नारीत्व का प्रतीक,
मुसीबतों से लड़े अकेली
निराधार नार निर्भीक ।
मोहान्ध हठधर्मी के आगे
विवश विभीषण की नम्रता,
सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त
समझे सीता की व्यथा ।
रावण समझाए न समझा,
राज-सभा में हुआ क्लेश ।
अपमानित कर मार-पीटकर
देश-निकाल का दिया आदेश ।
देश छूटा, भाई रूठा
पर रही अविचल नीतिमत्ता,
”घर का भेदी” कह कर क्यों हो
वीर विभीषण की निन्दा ?
सत्यनिष्ठ वह राम-भक्त
समझे सीता की व्यथा ।
वनिता ठक्कर