जब मोहब्बत की बात आती है,
तो हम सोचते है,
उस चकोर का क्या?
जो पूरी जिंदगी चांद को देखता रहता है,
और देखते देखते कब मर जाता है,
एक दीदार की चाह में,
पता ही नहीं चलता,
पर उसे इस बात की खुशी होती कि उसका महबूब सामने है,
हमने तो फिर भी कई दफा महबूब को देखा है,
उनका पास से दीदार किया है,
फिर सोचते है कहीं हमारा प्यार छिछला तो नहीं।
प्यार की गहराई नापने की चाह,
कहीं चकोर ही ना बना दे हमे।
-Krishna Katyayan