KUCH ALFAAZ ASIFA ke.....
#kavyotsav
बेहोष हू मै..पर कुछ एहसास जख्म बन मुझे रुला रहे है मा...
गुडीया केहती थी तू मुझे..देख ना कोई गुडीया समझ के मेरे शरीर से खेल रहा है मा..
डराती थी तू मुझे राक्षस के नाम से..देख ना शायद वही राक्षस मुझे निचोड रहा है मा..
आवाज देना चाहती हू मै तुझे..पर कुछ यु बेबस कर दिया है मुझे..बस बेहोष पडी हू मै मा..
मेहफूज थी मैं तेरी गोद मे..पर अब शायद तेरी आंचल से ज्यादा मेहफूज जगह जा रही हू मै मा....
वजुद हो जहा सच मे खुदा का...ऐसी जगह जा रही हू मै मा...