#kavyotsav
कैसे बताऊ के तुम मेरे कौन हो?
सांसो मैं तुम धड़कन मैं तुम
जहा देखता हूं बस तुम ही तुम हो
हवाओ मैं फिजाओ मैं तुम
रात में दिन में तुम
चाँद मैं तुम सूरज मैं तुम
सुबह की किरण मैं तुम
रात की चांदनी में तुम
जहाँ देखु बस तुम हो
ईमान,कर्म तुम धर्म भी तुम
इबादत भी तुम पूजा भी तुम
फिर कैसे बताऊ तुम मेरे कौन हो ?
मुझे खुद नही पता तुम कौन हो ?
मौन भी तुम संगीत भी तुम
सुर सरगम आगाज भी तुम
कौन हो तुम मेरे हो ये कैसे बतादूँ ?
क्या रिश्ता है क्या नाता है
क्यों ये मुझे समझ नही आता है ?
दूर इतना होकर भी एहसास
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा ही भाता है।
इस दिल से आहट जो निकली
उस आहट मैं भी तुम लेकिन
फिर भी ये ना समझा की तुम मेरे हो कौन ?
एक एहसास है वो एहसास भी तुम्हारा
जिंदगी बिन तुम्हारे लगती है
अधूरी क्या वो अधूरा एहसास हो तुम?
क्या हो तुम कौन हो मेरे तुम ?
क्या इस जीवन की हो मेरी प्रेम पिपासा ,
ना ही कोई रिश्ता ना कोई नाता
यह मुझको नही है समझ आता
फिर भी ना जाने क्यों एक अटूट सा
सबंध हम दोनों का ही नजर आता
देव देवी भगवान अल्लाह भी तुम