#kavyotsav
मित्रता
दर्द का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।
याद का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
कैसी कैसी ये दास्ता लिखता रहता यहां ।
प्यार का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
आंखो आंखो में होते थे जो इशारे सखी ।
बात का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
लड गई कीसीसे निगाहें शरारत में यूं ।
श्याम का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
छेड दिये सजन ने दिलोके सूरो को आज ।
साझ का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
एक दिन में शरीर मिट जाएगा मिट्टीमें ।
नाम का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
युगो युगो से साथ जो गुजारी थी कई ।
सांम का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
दिल में छुपा रखा था यूं गहेरे दर्द को ।
राझ का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।
बंदगी की तरह पूजा जिसको हंमेशा से ।
पाक का रिस्ता दूर तक साथ निभाता है ।।