#Kavyotsav
बस यूँही...
ऐ जिंदगी,
क्यों कहा था तूने
बस यही पड़ाव तेरा है,
फिर तो सिर्फ बैठ कर
मजे लेना जिंदगी के है...
बचपन में करी
बहोत सारी शैतानियाँ
पर ध्यान हमेशा था
सिर्फ पढाई-लिखाई पर,
कुछ बनना था शायद मुझे
शायद कुछ पाना था
या शायद एक बोझ था
ज़माने का मुझपर...
घनघोर तपस्या और मेहनत
हासिल कर लिया मक़ाम
पर शायद रह गया हूँ मैं
अंदर से खोकला और नाकाम,
हिमालय की चोटीपर हूँ
सबकुछ है आज मेरे पास
पर ना जाने क्यों लग रहा
की कोई नहीं आसपास...
कभी किसी वक्त बाते
किया करता था तुझसे
पर आज मेरी परछाई भी
है रूठ गयी मुझसे,
ना कोई आज है
मुझे मनाने के लिये
और नाही वक्त है मेरे पास
कुछ मनाने के लिये...
अकेला, सदमासा, मायूस
हूँ मैं आज ऐ जिंदगी
पलट कर वापस आ
और ले चल मुझे तू
उन्ही राहों पर जिन्हें मैं
कभी पीछे छोड़ आया था
शिकायत नहीं है तुझसे
पर रो पड़ता हूँ अचानक
ऐ जिंदगी बस यूँही
तेरी याद आती है
-- प्रफुल्ल मुक्कावार