हम से हमारा वजुद ना पुछो और हम से हमारी इन्सानीयत को ना जांचो,
हम गुलाम जरुर हे इस अंधेरे के लेकीन हमसे हमारी सवेरे की मुम्मींद ना छीनो,
हम आंसु को पी जाने वाले मामुली आसीक हि सहि पर इन आंसुओ का अहेंसास ना पुछो,
हम तामाचा सेह लेंगे पर युह सरेआम अलफाजो के बल पर हमारा तमाशा ना बनाओ।