मैं प्रतिज्ञा लेता हूं।
'... ' मारूंगा मैं लोगों को धर्म के नाम पर।
'...' वोट दूंगा मैं धर्म के नाम पर।
'...' गालियां दूंगा में नेहरू जैसों को।
'...' बाटूंगा मैं स्वतंत्रा सेनानियों को धर्म और राजनीतिक पार्टियों के नाम पर।
'...' बदल सकूंगा मैं मोबाइल में बैठें-बैठें देश को।
प्रिय पाठक, आपने ऊपर जो पढ़ा वो आज के अधिकतर युवाओं की प्रतिज्ञा हैं।मेरे अनुसार दुनिया का सबसे ताकवर शब्द 'नहीं' हैं। आप ऊपर '...' में नहीं भर कर फिर से पढ़िए और खुद सोचिए क्या बिना 'नहीं' बदल सकते हैं हम अपने देश का वेश।