Rooh se Rooh tak - 12 in Hindi Love Stories by IMoni books and stories PDF | रूह से रूह तक - चैप्टर 12

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रूह से रूह तक - चैप्टर 12

जैसे ही प्रोफेसर रणवीर ने पढ़ाना शुरू किया, पूरी क्लास ध्यान से सुनने लगी। कॉलेज का पहला दिन होने के बावजूद माहौल काफी अनुशासित और दिलचस्प था। ईनाया और अर्निका भी पूरे मन से लेक्चर में मग्न थीं।

बीच-बीच में, अंशुल मुस्कान के साथ ईनाया की ओर देख लेता, जबकि रिया बार-बार अपने फोन पर नजर डाल रही थी।

कुछ देर बाद, प्रोफेसर ने किताब बंद कर दी और बोले, "आज के लिए इतना ही। मैं चाहता हूँ कि आप सब लाइब्रेरी जाकर अपने विषय से जुड़ी और जानकारी हासिल करें। और हाँ, दोस्त बनाइए, क्योंकि मेडिकल की यह यात्रा आसान नहीं होगी, लेकिन सही लोग साथ हों, तो सफर सरल हो जाता है।"

प्रोफेसर के जाते ही क्लास में हलचल बढ़ गई। कुछ स्टूडेंट्स अपनी सीट पर आराम से बैठ गए, तो कुछ आपस में बातें करने लगे।

ईनाया ने अर्निका की ओर देखते हुए कहा, "लाइब्रेरी चलें? वैसे भी, मुझे देखना है कि यहाँ कौन-कौन सी किताबें मिलती हैं।"

अंशुल, जो उनके पीछे खड़ा था, मुस्कुराते हुए बोला, "अगर तुम लोगों को साथ चाहिए, तो मैं और युवराज भी चल सकते हैं।"

अर्निका हल्का मुस्कराई और बोली, "अभी नहीं, एक और क्लास बची है। उसके बाद चलते हैं।"

सभी ने सहमति में सिर हिलाया और बातचीत करने लगे।

उधर, रिया जो अब तक चुपचाप सब देख रही थी, अचानक कियारा की ओर मुड़ी और बोली, "मुझे तो ये ईनाया और अर्निका कुछ ज्यादा ही ओवरस्मार्ट लगती हैं!"

कियारा ने हल्का सिर हिलाया, "हाँ, लेकिन प्रोफेसर भी इनकी तारीफ कर रहे थे... लगता है, ये दोनों सच में इंटेलिजेंट हैं।"

रिया ने आँखें घुमाते हुए कहा, "जो भी हो, मुझे इनसे दोस्ती-वोस्ती नहीं करनी! और ये दोनों बनारस से आई हैं, स्कॉलरशिप पर पढ़ रही हैं, तो अमीर भी नहीं होंगी।"

कियारा ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, "कौन जानता है? मुझे तो लगता है कि ये किसी अमीर घराने से ही हैं।"

रिया ने भौंहें चढ़ाते हुए कहा, "अरे कियारा, अगर अमीर होतीं, तो स्कॉलरशिप की जरूरत ही क्यों पड़ती?"

कियारा ने कंधे उचकाए, "हर कोई पैसों के लिए स्कॉलरशिप नहीं लेता, कुछ लोग अपनी काबिलियत साबित करने के लिए भी ऐसा करते हैं। ईनाया और अर्निका को देखकर तो ऐसा ही लगता है।"

रिया ने नाराजगी से कहा, "जो भी हो, मुझे इनसे कोई मतलब नहीं है। वैसे भी, कॉलेज में सेंटर ऑफ अटेंशन मैं ही रहने वाली हूँ!"

कियारा हल्का मुस्कुराई, लेकिन कुछ नहीं बोली।

उसी समय, कॉलेज के डीन की असिस्टेंट क्लासरूम में आईं और बोलीं, "यहाँ अर्निका नाम की कोई स्टूडेंट है?"

उनकी बात सुनकर सभी की नजरें अर्निका की ओर चली गईं। अर्निका भी अपनी सीट से उठते हुए बोली, "जी, मैं हूँ। क्या मुझसे कोई काम था?"

असिस्टेंट ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "हाँ, डीन सर तुमसे जरूरी बात करना चाहते हैं। क्या तुम अभी उनके ऑफिस चल सकती हो?"


जैसे ही असिस्टेंट अर्निका को लेकर बाहर निकली, क्लास के बाकी स्टूडेंट्स उसे जाते हुए देखने लगे।

अर्निका ने थोड़ा असमंजस में कहा, "लेकिन अभी तो क्लास चल रही है... मैं कैसे—"

असिस्टेंट ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, "कोई दिक्कत नहीं, डीन सर ने खास तौर पर बुलाया है, तुम्हारी क्लास मिस नहीं मानी जाएगी।"

पीछे से प्रोफेसर बोले, "ठीक है, आप जा सकती हैं। अगर कोई नोट्स छूट जाए, तो मैं आपको अलग से समझा दूंगा।"

अर्निका ने एक पल के लिए ईनाया की ओर देखा, जिसने हल्की भौंहें उठाकर उसे जाने का इशारा किया।

"ठीक है, सर!" अर्निका ने कहा और असिस्टेंट के साथ क्लास से बाहर निकल गई।

जैसे ही वह गई, प्रोफेसर ने बाकी क्लास की ओर देखा और बोले, "अच्छा, अब हम क्लास जारी रखते हैं! आज का टॉपिक काफी दिलचस्प है, तो सभी ध्यान दें।"

स्टूडेंट्स अपनी किताबों की ओर देखने लगे, लेकिन कुछ की नज़रें अब भी दरवाजे पर थीं, जहाँ से अर्निका गई थी।

पीछे बैठी रिया ने कियारा की ओर झुककर फुसफुसाया, "देखा? पहले ही दिन इसे खास ट्रीटमेंट मिल रहा है!"

कियारा ने हल्का सिर हिलाया, "हाँ, लेकिन ये टॉपर भी तो है, इसलिए प्रोफेसर और डीन इसे खास तवज्जो देंगे ही।"

रिया ने आँखें घुमाते हुए कहा, "जो भी हो, मुझे तो इसकी इतनी अटेंशन पसंद नहीं आ रही!"

वहीं दूसरी तरफ, अंशुल ने ईनाया की ओर झुककर हल्के अंदाज में फुसफुसाया, "तुम्हारी दोस्त को डीन ने क्यों बुलाया? कोई प्रॉब्लम तो नहीं?"

विहानी ने भी चिंता जताई, "हाँ, कहीं कुछ गलत तो नहीं हुआ?"

ईनाया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "अरे, रिलैक्स! कोई काम होगा, इसलिए बुलाया होगा। वो आएगी तो पता चल जाएगा। फिलहाल, क्लास पर ध्यान दो!"

इतना कहकर वह खुद भी प्रोफेसर की बातों पर ध्यान देने लगी।


जैसे ही अर्निका असिस्टेंट के साथ डीन के ऑफिस की ओर बढ़ी, उसने हल्के संकोच से पूछा, "सर ने मुझे क्यों बुलाया है? क्या आपको पता है?"

असिस्टेंट ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मुझे भी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन सर के साथ कॉलेज के दो-तीन ट्रस्टीज़ भी हैं, जो तुमसे मिलना चाहते हैं।"

अर्निका यह सुनकर थोड़ा गंभीर हो गई। कुछ ही मिनटों में वे डीन के ऑफिस पहुँचे। असिस्टेंट ने अंदर जाने की अनुमति ली और फिर अर्निका को अंदर ले गया।

ऑफिस में दाखिल होते ही अर्निका की नजर वहाँ बैठे लोगों पर पड़ी। उसने सभी को विनम्रता से अभिवादन किया। डीन के साथ तीन अन्य लोग भी मौजूद थे, जो कॉलेज के ट्रस्टीज़ लग रहे थे। वे हल्की मुस्कान के साथ अर्निका का स्वागत करने लगे।

डीन ने हाथ के इशारे से उसे बैठने को कहा, "बैठो, अर्निका। हमें तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।"

अर्निका ने सिर हिलाया और धीरे से कुर्सी खींचकर बैठ गई। उसकी नजरें सामने बैठे ट्रस्टीज़ पर थीं। उनमें से एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारे बारे में हमने काफी सुना है। इस साल की टॉपर हो, और तुम्हारी मेहनत ने तुम्हें यहाँ तक पहुँचाया है। हमें तुम पर गर्व है।"

अर्निका ने विनम्रता से जवाब दिया, "थैंक यू, सर!"

डीन आगे बोले, "हमारी यूनिवर्सिटी में हर साल ‘स्टार स्कॉलरशिप’ दी जाती है, जो न सिर्फ स्टूडेंट की ट्यूशन फीस कवर करती है, बल्कि इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम्स का भी मौका देती है। इस साल, हमने यह स्कॉलरशिप पाँच स्टूडेंट्स को दी है। मेडिकल फील्ड से दो स्टूडेंट्स चुने गए हैं—एक तुम और दूसरी..."

अर्निका तुरंत बोली, "ईनाया?"

डीन ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया, "हाँ, बिल्कुल! लेकिन इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम का मौका हर फील्ड से सिर्फ एक स्टूडेंट को ही मिलता है। मेडिकल फील्ड में पूरे देश की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज़ से स्टूडेंट्स इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं।"

उन्होंने आगे समझाया, "हर दो साल बाद, यानी सेकंड ईयर खत्म होने पर, इस एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाती है। लेकिन पिछले तीन वर्षों में हमारी यूनिवर्सिटी से कोई भी स्टूडेंट इस परीक्षा को पास नहीं कर पाया। हम चाहते हैं कि इस बार तुम इसकी तैयारी करो, क्योंकि इस साल की टॉपर तुम हो।"

डीन की बात सुनकर अर्निका ने गहरी सांस ली। उसे एहसास हुआ कि यह न सिर्फ एक बड़ा अवसर था, बल्कि एक चुनौती भी।



अर्निका यह सुनकर कुछ पल के लिए चौंक गई। उसने गहरी सांस ली और सोचते हुए कहा, "सर, यह सच में एक बड़ा अवसर है, लेकिन क्या मैं इस परीक्षा के लिए खुद को सही से तैयार कर पाऊंगी?"

डीन मुस्कुराए और बोले, "हम जानते हैं कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि तुम इस परीक्षा को पास कर सकती हो। तुम्हारी मेहनत और काबिलियत ने तुम्हें यहाँ तक पहुँचाया है। अगर तुम तैयार हो, तो हम तुम्हारी हर संभव मदद करेंगे।"

अब तक चुप बैठे एक ट्रस्टी ने आगे कहा, "इस परीक्षा की तैयारी के लिए तुम्हें एक्स्ट्रा क्लासेज़, स्टडी मटेरियल और मेंटरशिप दी जाएगी। लेकिन यह पूरी तरह तुम पर निर्भर करता है कि तुम इस अवसर को किस तरह लेती हो।"

अर्निका ने कुछ देर सोचा, फिर आत्मविश्वास से कहा, "ठीक है, सर! मैं इस परीक्षा के लिए पूरी मेहनत करूंगी। मैं यह मौका छोड़ना नहीं चाहती।"

डीन ने संतोष से सिर हिलाया, "बहुत अच्छा! यही हमें सुनना था। तुम्हें जो भी ज़रूरत हो, मेरे असिस्टेंट से बात कर लेना। और हाँ, ईनाया को भी यह जानकारी दे देना। वह भी इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम में हिस्सा ले सकती है।"

अर्निका कुछ पूछने ही वाली थी कि तभी एक अन्य ट्रस्टी बोले, "हमारी यूनिवर्सिटी में मेडिकल फील्ड के लिए सिर्फ एक सीट है, लेकिन अगर कोई छात्र परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करता है, तो उसे किसी अन्य यूनिवर्सिटी की सीट मिल सकती है। ऐसे में हमारी सीट किसी और योग्य उम्मीदवार को दी जा सकती है।"

अर्निका ने सहमति में सिर हिलाया और सभी को धन्यवाद देते हुए बाहर जाने के लिए मुड़ी। तभी डीन ने उसे रोकते हुए पूछा, "क्या तुम माधवी त्रिपाठी की बेटी हो?"



डीन का सवाल सुनकर अर्निका कुछ पल के लिए ठिठक गई। उसने हल्की सांस ली और कहा, "जी सर, माधवी त्रिपाठी मेरी माँ थीं। लेकिन... आप उन्हें कैसे जानते हैं?"

डीन हल्का मुस्कुराए, फिर गंभीर स्वर में बोले, "तुम्हारी माँ हमारे समय की सबसे होनहार स्टूडेंट्स में से एक थीं। वो भी इसी कॉलेज से पढ़ी थीं और हमेशा टॉप किया करती थीं। हमें अब भी याद है, उन्होंने भी इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम की परीक्षा दी थी..."

अर्निका चौंक गई, "क्या? माँ ने भी यह परीक्षा दी थी?"

अब तक चुप बैठे एक ट्रस्टी ने आगे कहा, "हाँ, माधवी एक बेहतरीन छात्रा थीं। उन्होंने परीक्षा दी थी और पास भी कर लिया था, लेकिन... दुर्भाग्य से, वह इस स्कॉलरशिप का हिस्सा नहीं बन सकीं।"

अर्निका ने हैरानी से पूछा, "क्यों? जब उन्होंने परीक्षा पास कर ली थी, तो फिर?"

डीन ने गहरी सांस लेते हुए कहा, "कुछ कारणों से उन्हें स्कॉलरशिप छोड़नी पड़ी थी। इस बारे में ज्यादा जानकारी हमारे पास नहीं है, लेकिन आज वह देश की जानी-मानी डॉक्टर हैं और कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड भी जीत चुकी हैं। हमें पूरा यकीन है कि तुम भी अपनी माँ की तरह नाम रोशन करोगी।"

अर्निका के मन में कई सवाल उठने लगे, "माँ ने परीक्षा पास कर ली थी, फिर भी उन्हें जाने का मौका क्यों नहीं मिला? आखिर ऐसा क्या हुआ था?"

डीन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "ये सब पुरानी बातें हैं। फिलहाल, तुम्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। अगर तुम्हें कोई परेशानी हो या किसी मदद की जरूरत पड़े, तो मेरे पास आ जाना। अगर मैं न मिलूँ, तो मेरे असिस्टेंट से बात कर लेना। यह लो, उनका नंबर भी ले लो।"

अर्निका ने सिर हिलाते हुए कहा, "धन्यवाद, सर। मैं इस परीक्षा के लिए पूरी मेहनत करूंगी।"

डीन ने संतोष से सिर हिलाया और कहा, "गुड लक, अर्निका!"



अर्निका ऑफिस से बाहर निकली, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ परीक्षा ही नहीं, बल्कि अपनी माँ का अधूरा सपना और उनकी कहानी भी घूम रही थी। उसने अपने ख्यालों को झटका और सोचा कि घर जाकर माँ से इस बारे में बात करेगी। फिर वह क्लास की ओर बढ़ने लगी।

दूर से रिया उसे देख रही थी। उसकी आँखों में हल्की जलन और ईर्ष्या थी। उसने धीरे से फुसफुसाया, "अब तो और भी ध्यान इसी पर रहेगा!"

कियारा की ओर देखते हुए उसने कहा, "पहले ही इस पर सबकी नजरें थीं, और अब तो प्रोफेसर्स भी इसे और तवज्जो देंगे!"

कियारा ने हल्का सिर हिलाया, "हां, लेकिन अगर ये टॉप स्टूडेंट है, तो जाहिर है कुछ तो खास होगा।"

रिया ने आँखें घुमाते हुए कहा, "खास होगी अपनी जगह पर, लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता! देखना, मैं इससे ज्यादा अटेंशन लेकर दिखाऊंगी!"

उधर, अर्निका क्लासरूम के सामने पहुँची और एक प्रोफेसर से अंदर आने की इजाजत मांगी। प्रोफेसर ने सिर हिलाकर इजाजत दी, और वह अंदर आ गई। उसके चेहरे पर हल्की गंभीरता थी, लेकिन उसने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की।

उसे देखते ही ईनाया ने धीरे से पूछा, "सब ठीक है? डीन ने क्यों बुलाया था?"

अंशुल भी उत्सुक था, "हां, कोई प्रॉब्लम तो नहीं?"

अर्निका ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "नहीं, कुछ खास नहीं... बाद में बताऊंगी। अभी क्लास पर ध्यान दो।"

ईनाया ने भौहें चढ़ाईं, लेकिन ज्यादा सवाल नहीं किए।

सभी की नजरें अर्निका पर थीं, लेकिन कोई कुछ नहीं बोला क्योंकि प्रोफेसर क्लास में मौजूद थे।



कुछ समय बाद प्रोफेसर क्लास खत्म करके बाहर चली गईं, तो ईनाया ने उत्सुकता से अर्निका की ओर देखा और पूछा, "डीन ने तुझे क्यों बुलाया था?"

अंशुल और बाकी दोस्त भी अर्निका की ओर देखने लगे। उन्हें ऐसा करता देख अर्निका हँस पड़ी और बोली, "चलो, अभी कोई क्लास नहीं है, तो कैंटीन चलते हैं। वहीं सब कुछ बताऊंगी।"

उसकी बात सुनते ही सभी अपनी सीट से उठे और कैंटीन की ओर बढ़ने लगे। तभी पीछे से रिया की आवाज़ आई, "तो मिस स्कॉलरशिप, क्या आप सबको बता सकती हैं कि डीन सर ने आपको अपने ऑफिस में क्यों बुलाया था?"

अर्निका रिया की बात सुनकर रुकी, लेकिन उस पर ज्यादा ध्यान न देते हुए मुस्कुराकर बोली, "अगर आपको जानना है, तो डीन सर से जाकर पूछ लीजिए, वही सब बता देंगे। रही बात मेरे बताने की, तो अगर यह सबके सामने कहने लायक होता, तो डीन सर खुद क्लास में आकर अनाउंस कर देते!"

रिया अर्निका की बात सुनकर थोड़ा असहज हो गई, लेकिन खुद को संभालते हुए नकली मुस्कान के साथ बोली, "अरे, तुम्हें नहीं बताना है, तो मत बताओ, लेकिन यह कहने की क्या जरूरत थी कि डीन से जाकर पूछ लो? मैंने तो बस सबके बिहाफ पर पूछ लिया!"

ईनाया ने हल्के अंदाज में चुटकी ली, "अरे मिस रिया, बाकी सबको जानना होता, तो वे खुद अर्निका से आकर पूछते। असल में तुम्हें ही जानना था, है ना?"

रिया ईनाया की बात सुनकर तमतमा गई, लेकिन खुद को संभालते हुए फीकी हँसी के साथ बोली, "ओह प्लीज़! मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता! वैसे भी, अगर इतनी बड़ी बात होती, तो डीन सर खुद अनाउंस कर देते।"


अर्निका ने हल्का सिर झटकते हुए मुस्कुराकर कहा, "ठीक कहा तुमने, लेकिन कुछ बातें हर किसी के लिए नहीं होतीं। अब, अगर तुम्हारा इंटरव्यू खत्म हो गया हो, तो क्या हम कैंटीन जा सकते हैं?"

रिया ने होंठ भींचे, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। कियारा, जो अब तक चुप थी, उसके पास आई और धीरे से बोली, "छोड़ न, हमें इससे क्या लेना-देना!"

रिया ने गहरी सांस ली और सिर हिलाया, "तुम ठीक कह रही हो… लेकिन मैं इतनी आसानी से हार नहीं मानूंगी!" उसने मन ही मन सोचा, "अब देखना, मैं इससे ज्यादा लाइमलाइट लेकर दिखाऊंगी!"

इसके बाद अर्निका, ईनाया, अंशुल, विहानी और बाकी दोस्त कैंटीन की ओर बढ़ गए।

कैंटीन में:

सबने अपनी-अपनी पसंद का खाना और ड्रिंक्स ऑर्डर किया और एक टेबल पर बैठ गए। अंशुल अब और इंतजार नहीं कर सकता था। उसने सीधा पूछा, "अब तो बता दो, आखिर डीन ने क्यों बुलाया था?"

अर्निका ने गहरी सांस ली और कहा, "दरअसल, तुम सबको पता ही है कि मुझे और ईनाया को स्कॉलरशिप मिली हुई है…"

विहानी उत्साह से बोली, "हां, पता है! फिर? आगे क्या?"

अर्निका ने थोड़ा रुककर कहा, "स्कॉलरशिप के साथ-साथ हमें इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम का भी मौका मिला है। लेकिन इसके लिए एक कठिन परीक्षा पास करनी होगी। और कॉलेज चाहता है कि मैं इसकी तैयारी करूं, क्योंकि पिछले कई सालों से कोई भी इस परीक्षा को पास नहीं कर पाया है।"



ईनाया चौंककर बोली, "मतलब, ये सिर्फ स्कॉलरशिप नहीं, बल्कि विदेश में पढ़ने का भी मौका है?"

अर्निका ने सिर हिलाया, "हाँ, लेकिन हर फील्ड से सिर्फ एक स्टूडेंट को सेलेक्ट किया जाएगा। सर ने कहा कि मेडिकल फील्ड से मुझे इस परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए… और," उसने ईनाया की ओर मुस्कुराते हुए देखा, "तू भी इस स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई कर सकती है, लेकिन तुझे भी परीक्षा देनी होगी!"

ईनाया का मुँह खुला रह गया, "क्या? मतलब… मैं भी?!"

अंशुल और विहानी भी हैरान रह गए। अंशुल बोला, "यार, ये तो जबरदस्त खबर है! हमारी दोस्त अगर ये मौका हासिल कर ले तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है?"

विहानी ने सिर हिलाया, "हाँ, लेकिन मैंने सुना है कि ये परीक्षा बहुत मुश्किल होती है। पिछले कुछ सालों से हमारी यूनिवर्सिटी से कोई सेलेक्ट नहीं हुआ, इसलिए हमारी सीट किसी और यूनिवर्सिटी को देनी पड़ी।"

ईनाया को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था। फिर वह मुस्कुराकर बोली, "तो अब हमें साथ में इस परीक्षा की तैयारी करनी होगी!"

अर्निका ने हंसते हुए कहा, "बिल्कुल! अब देखते हैं, हम दोनों में से कौन इंटरनेशनल सीट पाता है… या फिर दोनों ही!"

उनकी बात सुनकर बाकी दोस्त हंस पड़े। फिर अर्निका ने उनकी ओर देखते हुए पूछा, "तुम लोगों को बुरा तो नहीं लगा कि सर ने सिर्फ हमारा नाम लिया?"

अंशुल तुरंत बोला, "अरे, इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है? हमें पता है कि ये परीक्षा कितनी मुश्किल होती है, और सर ने तुम दोनों का नाम इसलिए लिया क्योंकि तुम लोग इस साल टॉपर्स हो। हम सबको तुम पर गर्व है!"

विहानी ने भी मुस्कुराकर कहा, "बिल्कुल! हमें खुशी है कि तुम दोनों हमारी दोस्त हो!"

अर्निका ने राहत की सांस लेते हुए कहा, "बस, ये बात अपने तक ही रखना। किसी और को इस बारे में पता न चले।"

उसकी बात सुनकर अंशुल, युवराज और विहानी ने सहमति में सिर हिलाया। ईनाया ने कहा, "तू चिंता मत कर, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा। वैसे भी, जितना कम लोग जानें, उतना अच्छा!"



अंशुल मुस्कुराया, "और वैसे भी, ये तुम्हारी मेहनत का नतीजा है। तुम दोनों को इस परीक्षा के लिए चुना गया है, इसका मतलब है कि तुम सबसे काबिल हो। हमें बस तुम्हें सपोर्ट करना है!"

विहानी ने हंसते हुए कहा, "हाँ, और सपोर्ट के नाम पर मैं जबरदस्ती तुम दोनों को पढ़ने बैठाने वाली हूँ!"

"ओह गॉड!" अर्निका और ईनाया एक साथ हंस पड़ीं।

तभी कैंटीन के दूसरी तरफ रिया की नजर उन पर पड़ी। वह दूर से ही उनकी हंसी और खुशी देख रही थी, और उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने खुद से बुदबुदाया, "ये दोनों तो जैसे हीरोइन बन गई हैं!" फिर उसने कियारा और अपने बाकी दोस्तों की ओर देखते हुए कहा, "इन्हें केबिन कैसे मिल गया? जब मैं टॉप 30 फैमिली से हूं, तब भी मुझे नहीं मिला!"

कियारा ने शांति से जवाब दिया, "इसका अमीरी-गरीबी से कोई लेना-देना नहीं है। हर साल नए स्टूडेंट्स में टॉपर्स को कैंटीन में एक केबिन मिलता है, जिसे वे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं। और इस साल टॉप टू हमारी यूनिवर्सिटी में हैं, तो उन्हें मिलना लाज़मी था।"

रिया ने झुंझलाते हुए कहा, "तो सिर्फ ग्रेड्स की वजह से इन्हें यह स्पेशल ट्रीटमेंट मिला?"

कियारा ने कंधे उचका दिए, "और क्या! मेहनत का इनाम हर किसी को मिलता है, चाहे वो किसी भी बैकग्राउंड से हो।"

रिया ने गहरी सांस ली और गुस्से में अपने हाथ भींच लिए। "अगर ये दोनों टॉप पर हैं, तो मुझे भी वहां पहुंचना होगा! लेकिन अपने दम पर नहीं… बल्कि इनकी कमजोरियों का फायदा उठाकर!"

कियारा ने उसे संदेह भरी नजरों से देखा, "रिया, तुम कुछ गलत करने की तो नहीं सोच रही?"

रिया ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा, "अरे नहीं, मैं तो बस खुद को प्रूव करना चाहती हूं!"

लेकिन उसके मन में कुछ और ही चल रहा था…

उधर, अर्निका और ईनाया कैंटीन में अपने केबिन में बैठी थीं।

अंशुल ने मजाक में कहा, "यार, पहली बार ऐसा लग रहा है कि तुम लोगों की वजह से हमें भी वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है!"

विहानी हंसकर बोली, "अगली बार टॉप करने की मेरी बारी होगी, फिर मैं भी तुम लोगों को अपने केबिन में बुलाऊंगी!"

सभी हंसने लगे, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी यह खुशी किसी के लिए जलन बन रही थी… और जल्द ही, उनके लिए मुश्किलें खड़ी होने वाली थीं।

हंसी-मजाक के बीच वे खाना खाने लगे, अनजान कि उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आने वाला था।



खाना खत्म करने के बाद, अर्निका और उसके दोस्त क्लास के लिए कैंटीन से बाहर निकले। रास्ते में एक फील्ड के पास से गुजरते हुए उन्होंने देखा कि वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा थी।

अंशुल ने जिज्ञासा से कहा, "यार, वहाँ क्या हो रहा है? इतनी भीड़ क्यों लगी है?"

विहानी ने गर्दन उचका कर देखने की कोशिश की, "कोई खेल हो रहा है क्या?"

ईनाया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "चलो, पास जाकर देखते हैं!"

वे सभी भीड़ की ओर बढ़े। जैसे ही वे करीब पहुँचे, उन्होंने देखा कि मैदान के बीच दो लड़के आमने-सामने खड़े थे, और उनके चारों ओर भीड़ जोश में नारे लगा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहस या झगड़ा हो रहा हो।

अर्निका ने थोड़ा आगे बढ़कर पूछा, "यहाँ क्या हो रहा है?"

पास खड़े एक स्टूडेंट ने जवाब दिया, "यहाँ पुराने स्टूडेंट्स नए स्टूडेंट्स को लड़ाई के लिए चैलेंज करते हैं। अगर नया स्टूडेंट हार गया, तो उसे वही करना पड़ता है जो ये लोग कहेंगे।"

अर्निका ने हैरानी से कहा, "क्या? ये तो सीधी-सीधी रैगिंग है! कॉलेज प्रशासन इसे रोकता नहीं?"

वह स्टूडेंट कंधे उचकाते हुए बोला, "कई बार शिकायत की गई, लेकिन ये लोग इसे 'परंपरा' का नाम देकर सही ठहराते हैं। जो इसका विरोध करता है, उसे ही टारगेट बनाया जाता है।"

ईनाया गुस्से में बोली, "ये सरासर गलत है! किसी को जबरदस्ती लड़ाई में धकेलना ठीक नहीं!"

विहानी ने भी समर्थन किया, "और अगर कोई मना करे, तो उसे कायर कहकर नीचा दिखाया जाता है।"

अंशुल ने चिंता जताते हुए कहा, "लेकिन इसमें शामिल होना भी खतरनाक है। ये सिर्फ ताकत की लड़ाई नहीं होती, बल्कि लोग सच में घायल हो जाते हैं।"

तभी लड़ाई के बीच एक लड़का हार गया और दूसरा विजेता बना। जीतने वाला लड़का घमंड से बोला, "अब तुम हमारे नियमों के मुताबिक चलोगे, समझे?" हारने वाला लड़का धीरे-धीरे उठने की कोशिश करने लगा।

अर्निका ने गौर किया—जीतने वाला वही लड़का था, जिसे वह सुबह पार्किंग एरिया में मिली थी।

वो लड़का अब भीड़ की ओर देखते हुए चुनौती भरे लहजे में बोला, "अब कोई और है जो इस चैलेंज को लेना चाहता है?"

कुछ सेकंड तक सन्नाटा छाया रहा। कुछ लोग सर झुकाकर पीछे हट गए। तभी, एक लड़की आगे आई और बोली, "तुम दूसरों से क्यों पूछ रहे हो? हमारे ग्रुप में जिसे भी चैलेंज करना है, वो खुद तय करेगा।"

उसने आगे जोड़ते हुए कहा, "बस एक नियम है—लड़के सिर्फ लड़कों से लड़ सकते हैं, और लड़कियाँ सिर्फ लड़कियों से!"


तभी रिया आगे बढ़कर उस लड़की से बोली, "दीदी, क्या कोई लड़की किसी दूसरी लड़की को चैलेंज कर सकती है?"

रिया की बात सुनकर सभी उसकी तरफ देखने लगे। वह लड़की मुस्कुराई और बोली, "बिलकुल, मेरी बहन जिसे चाहे, उसे चैलेंज कर सकती है। अब बताओ, किसे चुनौती देनी है?"

रिया ने हल्की मुस्कान के साथ सामने इशारा किया, "उसे!"

सबकी निगाहें उस दिशा में चली गईं, जहाँ अर्निका खड़ी थी। लड़के उसे देखते ही रह गए, जबकि कुछ लड़कियाँ हल्का असहज महसूस करने लगीं। अर्निका की खूबसूरती और आत्मविश्वास को देखकर रिया की बहन जल उठी। उसने तुरंत अपनी ग्रुप की एक लड़की को इशारा किया कि वह अर्निका को चैलेंज करे।

अर्निका और उसके दोस्त वहाँ से निकलने ही वाले थे कि तभी एक आवाज आई—

"हे, ब्लैक जैकेट वाली… रुको!"

अर्निका रुक गई और पीछे मुड़कर देखा। एक लड़की, जिसने व्हाइट टॉप और ब्लैक जींस पहनी थी, उसकी ओर बढ़ रही थी। उसकी आँखों में चुनौती की चमक थी, और होंठों पर एक हल्की मगर घमंड भरी मुस्कान थी।

"तुम ही हो न, जो मेडिकल फील्ड की टॉपर हो?"

अर्निका ने शांत स्वर में कहा, "हाँ, लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है?"

लड़की ठहाका मारकर हँस पड़ी, "फर्क पड़ता है, क्योंकि जब किसी को इतनी इज्जत मिलती है, तो उसे अपनी ताकत भी साबित करनी पड़ती है। सिर्फ पढ़ाई में अच्छा होने से कुछ नहीं होता, बाकियों में भी तो अच्छा होना चाहिए न जिसे डांस में सिंगिंग में या फाइटिंग में किया कहते हों तुम मुझे लगता है तुम सिर्फ पढ़ाई में ही अच्छी बाकी बाकी तुम्हे कुछ आता भी होगा ।













आगे किया होगा जानने के लिये मेरी कहानी रूह से रूह तक पढ़ते रहिए 

अगर कहीं कोई गलती हो गई हो, तो मुझे माफ कर दीजिएगा।

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