मैं और मेरे अह्सास
तजुर्बा
तजुर्बा सबसे बड़ा शिक्षक होता हैं l
वो समाज में संस्कार को बोता हैं ll
समझता जो अपनेआप को बादशाह l
खुद में मशगूल होकर वह सोता हैं ll
अपनों के गिले को जल्दी भूलकर l
शिकवे को रफ़ा दफ़ा कर धोता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह