प्रेम में छले जाना किसी अभिशाप सा है, वो छल मात्र मनुष्य से नहीं अपितु आत्मा से भी होता है, भावनाएं छली जाती हैं,यह कोई घटना नहीं जो होकर समाप्त हो जाए ये पीड़ा ठहर जाती है नासूर की तरह, जो मनुष्य को खोखला करती है, इतना खोखला कि एक भाव बचता है घृणा का और एक इच्छा, मृत्यु की...!!!