हत्या का रहस्य एक पर्दा है,
जब यह उठता है, तो सच का पर्दाफाश हो जाता है।
फिर चाहे कोई भी हो अपराधी—
चोर, डकैत, ठग या कोई बलात्कारी!
बस फर्क इतना है...
कोई सत्ता की आड़ में छिपकर बच जाता है,
कोई नोटों के दम पर कानून को खरीद लाता है।
अदालतों की तारीखों में सत्य कहीं खो जाता है,
और मुजरिम खुलेआम सरेराह मुस्कुराता है।
इंसाफ की लड़ाई बहुत लंबी और बड़ी है,
जहाँ हर मोड़ पर ज़मीर की कीमत लगी है।
भेड़िए आबरू लूट लेते हैं चंद मिनटों में,
और ताउम्र की चीखें दब जाती हैं सन्नाटों में।
कब तक मोमबत्तियों के धुएं में न्याय तलाशोगे?
कब तक गुनाहगारों को सत्ता की छांव में पालोगे?
जब तक कानून का खौफ दिल में न जागेगा,
तब तक हर बेकसूर यूँ ही इंसाफ को तरसेगा।