मैं और मेरे अह्सास
सावन
तितलियों के नाम से ख़ुशबु चुराता कौन हैं l
बाग से फूलों को चुपचापी उठाता कौन हैं ll
रोज ही सुनाई देती है सदाएं सखी को l
दूर से आवाज़ दे देकर बुलाता कौन हैं ll
कोई तो है हर जगह मोजूद रहता है सदा l
यूँ सवेरे नीद से जग को उठाता कौन हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह