तुम कहते हो कि तुम मजबूर हो,
हम तो शिकवा भी नहीं कर सकते ।
खाली पन्ना जो रह गया बाकी हमसे ,
उसमें आहे के सिवा कुछ लिख नहीं सकते।
नाज करले आज अपने जुगनू पर सनम,
हम तो खिड़की से चांद को निहार नहीं सकते ।
बिखर जाएंगे बनके सितारे आसमान में,
जमीन पर किनारे बनकर नहीं रह सकते ।
आश जो हमेशा कल का भरोसा देती हैं,
उस पर आज को नहीं टाल नहीं सकते ।