कुछ लम्हों की बात है, आँखों में आब है,
तुम हँसते-हँसते मत जाना, मैं डूब जाऊँगा।।
दिल पर पत्थर यूँ कुछ लम्हें रख सकता हूँ,
ज़्यादा दूर हुए तो ज़िंदगी से ऊब जाऊँगा।।
सताया जा रहा हूँ आजकल चारों तरफ़ से,
गर तुमने भी मुँह फेर लिया तो कहाँ जाऊँगा।।
ममता है जो तो इसे हमेशा कायम रखना,
आँचल दूर हुआ तो सर रखने कहाँ जाऊँगा।।
- Alok Ks