आजकल सोशल मीडिया पर एक अजीब सी लड़ाई चल रही है—
पत्नी बनाम प्रेमिका।
कोई पत्नी को गलत बता रहा है,
कोई प्रेमिका को।
लेकिन एक बात सोचिए...
दोनों एक-दूसरे से क्यों लड़ रही हैं?
बीच में तो एक ही आदमी है।
वही आदमी जिसने पत्नी से रिश्ता बनाया,
वही आदमी जिसने प्रेमिका से प्रेम का वादा किया,
और फिर दोनों को एक-दूसरे के सामने खड़ा कर दिया।
पत्नी तो उसकी पत्नी थी,
लेकिन अगर वह प्रेमिका से सच में प्रेम करता था,
तो उसे छुप-छुपकर रिश्ता चलाने के बजाय
साफ-साफ शादी करनी चाहिए थी।
प्रेमिका से शादी करना चाहता था तो पत्नी को धोखा क्यों दिया?
और अगर पत्नी के साथ रहना था,
तो किसी दूसरी औरत को प्रेम के सपने क्यों दिखाए?
सोचिए...
गलती सिर्फ दो औरतों के बीच क्यों बाँटी जा रही है?
जिस आदमी ने दोनों की भावनाओं से खेला,
जिसने एक को पत्नी बनाकर दूसरी को उम्मीद दी,
उससे सवाल क्यों नहीं?
किसी दूसरी औरत को अपना दुश्मन बनाने से पहले
एक बार उस आदमी से पूछिए—
“अगर तुम मुझसे इतना प्रेम करते थे, तो मेरे साथ खड़े क्यों नहीं हुए?”
और प्रेमिका से भी यही कहना चाहूँगी—
जो आदमी अपनी पत्नी के साथ ईमानदार नहीं रहा,
वह आपके साथ ईमानदार रहेगा—
इसकी गारंटी कौन देगा?
और पत्नियों से भी—
हर दूसरी औरत आपकी दुश्मन नहीं होती।
कई बार वह भी उसी झूठ का शिकार होती है,
जिस झूठ से आप अनजान थीं।
इसलिए औरत बनाम औरत की लड़ाई बंद कीजिए।
गलत आदमी को गलत कहिए।
क्योंकि दो औरतों को लड़ाकर
एक गलत इंसान को सही साबित नहीं किया जा सकता।
प्रेम अगर सच्चा है तो सम्मान देगा,
जिम्मेदारी देगा,
सच के साथ खड़ा होगा।
सिर्फ छुपकर इस्तेमाल करेगा और वादे करता रहेगा—
तो वह प्रेम नहीं, स्वार्थ है।
और याद रखिए—
किसी औरत को गिराकर अपनी जगह ऊँची नहीं होती।
गलत इंसान को पहचानकर ही अपनी जिंदगी बचाई जाती है। ❤️
- archana