*पहाड़ों की सुंदरता*
पहाड़ों के दामन में भी
सुंदरता का अनमोल खज़ाना है।
जो किसी कलाकार ने नहीं,
स्वयं प्रकृति ने अपनी मर्ज़ी से सजाया है।
कहीं वह प्रकृति की गोद में बैठा
एक चंचल बालक-सा मुस्कुराता है,
तो कहीं हरी चुनरिया ओढ़े
किसी प्रतीक्षारत युवक-सा नज़र आता है।
कहीं चट्टानों पर अडिग खड़ा
योगी की शांत मुद्रा धारण किए,
तो कहीं नदियों की निर्मल धाराओं का
आभूषण पहन इठलाता है।
हरियाली की चादर ओढ़े,
अपना दामन फैलाकर मानो कहता है—
"धूप हो या बारिश,
जीवन के हर मौसम को
अपने आगोश में समेट लो।"
और अंत में यही संदेश देता है—
"जीवन में चाहे कितनी भी उलझनें आएँ,
पहाड़ों की तरह अडिग,
दृढ़ और अचल बने रहो।"
— Shree... Ripal Vyas
- Shree...Ripal Vyas