सावन दस्तक देने लगा है
सावन दस्तक देने लगा है
मौसम अब बरसने लगा है
कितनी ही आंखें राह देखती
सावन में ही मायके की देहरी मिलती
अपनों से मिलन की आस में
आंखों से सावन झरने लगा है
महादेव की मस्ती में दीवाने
भक्त कावर सजाने लगे हैं
फसलों को लहराता देख
किसान भी सपने सजाने लगे हैं
धरती हरा-हरा श्रृंगार किए बैठी है
दूर देश से पंछी भी अब आने लगे हैं
सावन अब दस्तक देने लगा है
जिंदगी की तपिश में, उम्र की दुपहरी में
बारिश की बूंदें, जख्म सहलाने लगी हैं
सबकी आस अपनी है सावन से
सावन सबको भाने लगा है
सावन की मस्ती संग है लाती
तीज का मनुहार, राखी का प्यार
अमिया के झूले, मन करे बेक़रार
सबको रहता इसका इंतज़ार
सावन दस्तक देने लगा है
रिमझिम सावन बरसने लगा है
---
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली