कोरा पन्ना
क्या लिखूँ, रचूँ जो, भीगा यह संसार है,
छोड़ दूँ, या रिक्त कर दूँ, कोरा पन्ना साथ है।
ललाट पर चस्पा दूँ, छपवा दूँ उसका इनकार है,
गुदगुदी छोड़ दूँ, या दर्द जोड़ूँ, स्वयं समापन है।
बुलावा भूल जाऊँ, नाम मिटा दूँ, द्वार बंद है,
अधीरता छोड़ दूँ, पागलपन पीकर, विचार बंद है।
स्याह कलह दूँ, उसका अब शत्रुओं में नया पायदान है,
सज़ा करार दूँ, समांतर अब मेरे, गुनाह तामील है।
क्या लिखूँ, रचूँ जो, भीगा यह संसार है।