2021 के बाद आज लिख रही हूँ।
बहुत समय के बाद इस app पर आयी हूँ, बहुत कुछ बदल गया है इसमें।
*कौन करेगा मुझसे प्रेम, मेरे सम्पूर्ण सत्य के साथ?*
मैं कोई किंवदंती नहीं,
न इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों पर अंकित कोई आदर्श नारी।
मैं तो बस एक साधारण-सी स्त्री हूँ—
जिसकी आँखों में कुछ अधूरे स्वप्न हैं,
और हृदय में अनगिनत अनकहे संवाद।
मैं हँसती हूँ तो खुलकर हँसती हूँ,
रोती हूँ तो चुपचाप भीग जाती हूँ।
छोटी-सी स्नेहिल बात पर खिल उठती हूँ,
और एक उपेक्षा पर भीतर तक टूट भी जाती हूँ।
स्वाभिमान मेरा स्वभाव है,
और संवेदनशीलता मेरी नियति।
मैं प्रेम करती हूँ तो सम्पूर्ण समर्पण से,
और विरोध करती हूँ तो सम्पूर्ण साहस से।
जब मेरे अस्तित्व पर प्रश्न उठते हैं,
तो मेरे भीतर की अग्नि जाग उठती है;
पर वही अग्नि किसी अपने के दुःख पर
दीपक बनकर भी जलती है।
मैं पूर्ण नहीं हूँ—
मेरे भीतर असंख्य कमियाँ, भय, उलझनें और आकांक्षाएँ हैं।
किन्तु इन्हीं सबके बीच
एक निर्मल हृदय भी है,
जो प्रेम को पूजा की तरह सँजोकर रखता है।
इसलिए कभी-कभी मन पूछ बैठता है—
क्या कोई होगा,
जो मेरे सौन्दर्य से नहीं,
मेरे स्वभाव से प्रेम करेगा?
जो मेरे मौन को भी सुनेगा,
मेरी जिद को भी समझेगा,
मेरे आँसुओं को भी स्वीकार करेगा,
और मेरे स्वाभिमान का सम्मान करेगा।
क्या कोई होगा,
जो मुझे बदलने के लिए नहीं,
मुझे समझने के लिए प्रेम करेगा?
क्योंकि हर साधारण स्त्री के भीतर,
एक असाधारण संसार बसता है।