“औरत बुरी नहीं होती…
उसे बुरा बना दिया जाता है।”
जब वह चुप रहती है…
तो उसे कमजोर कहा जाता है…
जब वह बोलती है…
तो उसे “घर तोड़ने वाली” कहा जाता है…
वह सिर्फ अपनी बात कहना चाहती है…
अपने दर्द को बाँटना चाहती है…
पर उसका अपना ही आदमी
उसे गलत समझ लेता है…
अगर वह पति से कहे — तो गलत…
अगर बाहर कहे — तो चुगलखोर…
आखिर…
वह अपने दिल की बात किससे कहे…?
🖤 “पतियों से बस इतना सा निवेदन है…”
अपनी पत्नी को जज मत करो…
पहले उसे समझने की कोशिश करो…
क्योंकि…
अगर उसे घर तोड़ना होता…
तो वह कब की जा चुकी होती…
वह आज भी वहीं है…
क्योंकि उसे “घर बचाना” आता है… 💔