मैं और मेरे अह्सास
जीने के हैं चार दिन
जीने के हैं चार दिन, हँसकर खुलकर जी लो l
यार दोस्तों के संग खुशी का जाम पी लो ll
छोड़ो सब चिंताएं क्या रखा है? आओ नाचे l
नशीली फ़िजाओं में जरा सा झूम भी लो ll
कल की किसको ख़बर क्या होने वाला है तो l
आज मस्ती के पल जिगरो जान में सी लो ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह