मुझे नींद की तलाश नही , मगर खाब है जो खुद से पूरे नही होते |
हकीकत वो नही है जो दिखाई नही जाती, हकीकत वो है जिससे लोग मुखातिब नही होते |
जमी पर ही रहे गया वो शख्स, जिसके मुककदर मे पर नही होते |
लोटाऊ कैसे उस शख्स का कर्ज, जिसके कांधे पर अब सफर नही होते |
आवाजे आती है मिटा दे मुझे, हम है कि बेवजह बेसब्र नही होते |
-MASHAALLHA