एक वो इन्सान जिसकी प्रकृति बिल्कुल शांत हो, और दूसरा इन्सान वो जो ज्यादा गुस्सेवाली प्रकृति रखता हो,
ये दोनों प्रकृति वाले इन्सान अपने अपने जीवन में इन्हें जो चाहिए वो हांसिल कर सकते है, मगर...ज्यादा से ज्यादा 80 प्रतिशत, और वो भी किसी न किसी की, थोड़ी बहोत दया, दबाव, डर, या फिर किसी की रहम नजर के कुछ प्रतिशत मिला के, इसके बाद भी, जो मिलता है, इसका भी सही आनंद तो इससे भी 50 प्रतिशत कम ले पाते हैं, यदि हम जो मिले, जितना मिले, इसका सो प्रतिशत आनंद लेना चाहते हैं तो, हमें शांत, और गुस्सा दोनों प्रकृति का पूर्ण ज्ञान होना, और उस ज्ञान का सही इस्तेमाल करना भी सीखना ही होगा, और इसको सीखना बिल्कुल सरल है, इसके लिए हमें सिर्फ इतना ही करना होगा कि,
हमें कब, कौनसी बात पे कितना शांत रहना है, इसका पता "हमको" और हम कब, और कौनसी बात पे गुस्सा होंगे इसका पता "सामनेवाले को" होना अति आवश्यक है.